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king राजा का उत्तराधिकारी कौन बना 2 / story of the king

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king राजा का उत्तराधिकारी कौन बना 2 story of the king

king राजा का उत्तराधिकारी कौन बना 2 story of the king

एक बार की बात है, तुगलकनगर राज्य में प्रताप सिंह नाम का एक राजा था। यह राजा बहुत ईमानदार और साहसी थे और उन्हें अपनी प्रजा से बहुत प्यार था। उनके राज्य में सभी लोग उनसे बहुत खुश रहते थे। लेकिन राजा को एक समस्या का समाधान निकालने में हमेशा परेशानी होती थी – उनके पास कोई वारिस नहीं था

एक दिन राजा ने अपने राज्य के लिए एक उत्तराधिकारी चुनने का फैसला किया। उन्होंने अपनी ही तरह ईमानदार और नेक युवक को चुना, जिसे वह प्रजा का ख्याल रखने की प्रतीति थी

राजा ने काफी सोच-विचार करके राज्य के सभी प्रतिभाशाली बच्चों को दरबार में बुलाया और एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी चुनना चाहता हूं। इसके लिए आप सभी को एक परीक्षा दी जाएगी, जो पास होगा, वही मेरा उत्तराधिकारी बनेगा।” उन्होंने सभी बच्चों को एक-एक बीज दिया और कहा कि इसे गमले में लगाकर उन्हें अच्छे से पालना है

चार महीने बाद, सभी बच्चे अपने पौधों के साथ दरबार में वापस आए। सभी के पौधे खूबसूरत और स्वस्थ थे, लेकिन क्षितिज नाम के एक बच्चे के गमले से कोई पौधा नहीं उगा था। इस परीक्षा में सफलता पाने के बारे में सभी बच्चों ने सोचा था, लेकिन क्षितिज ने इसे ध्यान से नहीं लिया था। राजा ने क्षितिज को उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय लिया, क्योंकि वह एक सच्चे और ईमानदार व्यक्तित्व के धनी थे

क्षितिज के साथ के अन्य बच्चों के पौधे बड़े होने लगे थे, लेकिन उसके गमले से कोई पौधा नहीं उगा था। यह देखकर वह बहुत परेशान हो गया। उसका मन ही मन यह सोचता रहता था कि सभी के गमले में पौधे आ गए, लेकिन उसके गमले से क्यों नहीं आ रहा है। उसने सोचा कि शायद उसका पौधा उगने में अधिक समय ले रहा है, इसलिए उसने हार नहीं मानी और अधिक ध्यान देने का निर्णय लिया

धीरे-धीरे चार महीने बीत गए, लेकिन क्षितिज के गमले से कोई पौधा नहीं आया। वहीं, ज्यादातर सभी बच्चों के गमले में पौधे बड़े हो गए थे। कुछ बच्चों के पौधों में तो फूल और फल भी दिखने लगे थे। राजा के पास जाने का समय आ गया। क्षितिज ने सोचा कि वह राजा के पास जाएगा, तो उसका गमला देखकर सब उसका मजाक बनाएंगे। कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करेगा कि वह हर दिन गमले में पानी देता था और उसकी देखभाल करता था

क्षितिज की मां ने उसे समझाया और कहा कि नतीजा कुछ भी आया हो, लेकिन वह राजमहल अपने बीज लौटाने जाना चाहिए। जो होगा देखा जाएगा। मां के समझाने पर क्षितिज ने मान लिया और खाली गमला लेकर राजमहल पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने देखा कि सभी के गमलों में सुंदर-सुंदर पौधे दिख रहे हैं और सभी बहुत खुश हैं। उसका गमला देखकर सभी हंसने लगे और अपनी मेहनत का बखान करने लगे। वह चुपचाप आंखें नीचे किए शर्म से बैठ गया

इतने में राजा आए और सभी के गमलों को ध्यान से देखने लगे। जब वह क्षितिज के गमले के पास पहुंचे तो उन्होंने पूछा- “यह किसका गमला है
क्षितिज- “जी, मेरा है
राजा- “तुम्हारा गमला खाली क्यों है
क्षितिज- “मैं रोजाना इसे पानी देता था। मैंने इसकी बहुत देखभाल की, लेकिन इसमें से पौधा नहीं निकला।”

राजा- “आओ मेरे साथ

क्षितिज राजा द्वारा बुलाने पर डर गया, लेकिन उसे राजा की आज्ञा माननी ही थी। धीरे-धीरे राजा की तरफ आगे बढ़ते हुए उसे गर्व से खड़ा होने का एहसास हो रहा था। राजा उसे सिंहासन के पास ले गए और बोले- “तुम ही इस राज्य के असली उत्तराधिकारी हो। मैंने जो बीज दिया था वह नकली था। उससे पौधा निकलने की कोई संभावना नहीं थी। आपने ईमानदारी के साथ 4 महीने मेहनत की और अपनी असफलता को स्वीकार करते हुए मेरे सामने खाली गमला लाने का साहस दिखाया। क्षितिज में वो सारे गुण हैं, जो एक राजा में होने चाहिए। इसलिए इस राज्य का अगला उत्तराधिकारी मैं क्षितिज को बनाता हूं।

सभी युवकों का सिर शर्म से झुक गया। वे चुपचाप दरबार से बाहर निकल गए। इस तरह क्षितिज ने ईमानदारी की बदौलत राज्य का सिंहासन पा लिया

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि ईमानदारी और सत्य की प्रतिष्ठा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। क्षितिज ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से अपने लक्ष्य को हासिल किया, जिससे उसे सिंहासन का उत्तराधिकारी बनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में अगर हम सत्य और ईमानदारी से चलते हैं, तो हमें सफलता और सम्मान जरूर मिलता है

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